Wednesday, 30 January 2019

बस इतना सा ख्वाब था (है)

बस इतना सा ख्वाब था【है】!!!!
आज भी जब  रविवार को सुबह 9 बजते है,मन में जरा सी हलचल होती है,व्याकुल हो उठता है मन रामानंद सागर कृत महाभारत की शुरुआत  को देखने के लिए,एक बुलंद आवाज़ और चक्र जो अपने आप को समय कहता था,"मैं समय हु",हमेशा से ही सोचता था की समय का इतना भी क्या महत्त्व है,पर समय ने समय की उपयोगिता से परिचित करवा दिया ||
आज भी  हर रविवार 9 जरूर बजते है लेकिन अब में टीवी के सामने न होकर परीक्षा केंद्र के सामने होता हु,और उन तमाम  लोगो की भीड़ का हिस्सा बन जाता हु जो आँखों में सपने लिए और घरवालो की उम्मीद का बोझ लेकर लाइन लगा लेते है।दिमाग में बहुत सी बातें एक साथ चलती है,क्या मेरा चयन होगा?,क्या में प्रश्न हल कर पाउँगा?मेरे पास यह आखरी मौका है,ऐसे तमाम विचारो के साथ जैसे कदम परीक्षा केंद्र के पास पहुचते है,आप पाते हो मेरे जैसे और भी लोग है जो यही सोच के साथ अपनी  मंज़िल पाने को तैयार है,दया आती है उन उम्मीदवारों के माता पिता पर जो सिर्फ मनोबल बढ़ाने अपने बच्चों के साथ परीक्षा केंद्र तक आते है।उम्मीद एक ऐसी चीज है जो मुफ़्त में मिलती है और जिसको फलती है उसकी किस्मत पलट देती है।दो घंटे का समय जिसमे आपकी काबलियत को परख जाएगा,और उत्तीर्ण होने पर मनपसंद नौकरी आपकी।ऐसा नहीं है के हम पढाई में अव्वल नहीं है,फर्क बस इतना है की जो दो घंटे में समय का सदुपयोग कर ले ,जीत उसी की है।केंद्र में बैठे बैठे,वही झलकिया दिमाग में आती है और गूंजती है "मैं समय हु",परीक्षा के बाद अमूमन  सबसे यही कहते सुना जाता है,काश थोडा और टाइम मिल जाता😢।दरअसल यह सब अपने ख्वाबो को पाने के लिए होता है,आज के युग में कोई पढ़कर ,कोई नौकरी कर अपने ख्वाबो की तरफ भाग रहा है,ख्वाब तोह मेरे भी है अनगिनत सपने है जिसे पूरा करना है,अंग्रेजी में उनहे बकेट लिस्ट भी कहते है,बकेट लिस्ट शब्द का प्रचलन भले ही अभी आया हो,किन्तु मेरे लिए तोह यह इसका मतलब बहुत पहले ही आ चूका था।जब छोटे थे तोह लगता था की हम बहुत ही ख़ास मकसद के लिए इस दुनिया में जन्म लिए है,अभी भी ऐसा ही लगता है,लेकिन रोजमर्रा के तनाव ऐसे होते है जिसके कारन कही न कही हम अपने आप  को खोते  जा रहे है,।ख्वाब बस इतना सा है की हमेशा माता पिता को अपने उपलब्धियों से गौरवंतीत करते रहे,ख्वाब इतना सा है की ऐसे कार्यस्थल में जाए जहा ईर्ष्या ,राजनीती,कपट,चापलूसी  करने वालो से दूर रहे,ख्वाब इतना सा है की कार्यस्थल से 7बजे वापस आये, खवाब इतना सा है की रॉयल एनफील्ड चलाते हुए फिर से क्रिकेट ,बैडमिंटन खेलने क्लब जाया जाये।ख्वाब इतना सा है की कभी "वो समवन स्पेशल के साथ मुलाकात हो जाए",(नामुमकिन 👼😹)।
खवाब इतना सा है की अपने प्रिय मित्रो के साथ कोई हॉलिडे डेस्टिनेशन जाया जाए,जहा ज़िन्दगी न मिलेगी दोबारा जैसे पलो को जिए,पानी के भीतर दुनिया महसूस करे,हवा में उड़ते हुए अपने आप को सुपरमैन जैसा महसूस करे,बनजी जंपिंग के माध्यम से रोड रनर के द कोयोटे जैसे गिरने को महसूस करे।ख्वाब  इतना सा है की कभी सचिन,राहुल द्रविड़,धोनी जैसे खिलाडीयो से मिलु और उन्हें बता सकु की कितना गहरा प्रभाव  उन्होंने मेरे जीवन में किया,ख्वाब इतना सा है की रिची रिच के प्रोफेसर किनबीं को अपने पास बुला कर उनसे नित्य नए अविष्कार करवाऊँ, ख्वाब इतना सा है की अंकल स्क्रूज के तैखाने में मैं भी तैराकी करू।ख्वाब इतना सा है की शका लका बूम बूम की मैजिक पेंसिल ही कम से कम हाथ लग जाए।ख्वाब इतना सा है की जेठालाल जैसी मुसीबतो में नहीं फसु।ख्वाब इतना सा है की "पैलेस ऑन  व्हील्स ",में महाराजा जैसे सफ़र करू  और  शाही मेहमाननवाजी का लुत्फ़  उठाऊ।जब कवी माखन लाल चतुर्वेदी पुष्प की अभिलाषा बता सकते है,लाठी के सहारे चलने वाली वृद्ध औरत मटके पर बैठकर अपने ससुराल जा सकती है(चल रे मटके तम्मक टू) ,जब गलीवर अपनी इच्छाशक्ति से दूसरी दुनिया से लौट सकता है,।तोह मै तोह एक इंसान हूँ, जिसकी अनगिनत आकांशाये और अभिलाषाएं है और दृढ़ इच्छाशक्ति से सब के सब तोह नही किंतु कुछ ख्वाब तोह जरूर पुरे हो सकते है,जब तक पुरे नहीं हो जाते,बस चलते रहना  है।
चाँद तारे तोड़ लाऊ, सारी दुनिया पर में छाऊ,इतनी से है दुआ,मैं ज्यादा नहीं मांगता।।।।
 बस इतना सा ख्वाब है।
अक्षय 😊

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